मुझसे मिले..

विचारों ने मुझे एक नया आकाश दे दिया हो जैसे ! कल्पना के पंख मेरे भी नए नए से !
ऑफिस की फाइलों में जिंदगी कहीं दौड़ती भागती जा रही थी और अपने ख़्वाब में भी मैंने कभी नहीं सोंचा था कि कभी मैं भी लिखूंगी और उसे पसंद भी किया जायेगा|
कॉलेज डेज मैं जब किसी लैंग्वेज स्टूडेंट को मदद करती तो वाह वाही ज़रूर मिलती|
ऐसे ही जब मैं इंटरनेट ब्राउज कर रही थी कि तो मुझे Momspresso की वेबसाइट मिली और यहाँ से मेरी जिंदगी ने मुझे अपने उस “मैं” से परिचय कराया जो मुझमे कहीं छिपा बैठा था | मैं उस “मैं ” से अनजान थी अबतक !
मुझे तो अभी याद नहीं पर मेरा नंबर कोई 170 या 180 में होगा और इससे भी ज्यादा हो सकता है | बड़े हसरत से आवर कंट्रीब्युटर्स की लिस्ट देखती और देखते ही देखते आज मेरी रैंकिंग 1 है |
हाथ में लॉ की डिग्री है इसलिए लिखना मेरा पेशा नहीं, हॉबी है, जो मुझे मेरे करीब ले जाता है!
दिल से निकली बात दिल तक पहुँचती है और सर नतमस्तक हो जाता है अपने viewers के लिए जिन्होनें मुझसे कनेक्ट किया,दिल को एक बंधन में जोड़ दिया | इनमे से कुछ मुझसे FB पर जुड़े और कुछ के मुझे इनबॉक्स मैसेज मिलते रहते हैं | जुलाई के महीने से शुरू किया मेरे ब्लॉग ने मुझे कितने लोगों के दिल के करीब ला दिया कि आज एक जिम्मेदारी कन्धों पर है कि जब भी लिखूं ,कुछ रचनात्मक लिखू |
इस वेबसाइट और मेरी बेटी अम्बिका से मिली प्रेरणा ने मुझे प्रोत्साहित किया कि अब मै अपने लिए कुछ लिखूँ | इसी भावना के साथ मैंने शुरुआत तो कर दी है | देखना चाहती हूँ कि भविष्य ने मेरे लिए क्या और भी मंज़र संभाल रखें हैं |

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